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वायरल वीडियो ने खोली स्वास्थ्य विभाग की पोल, कप्तानगंज CHC बना वसूली सेंटर

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कुशीनगर।
जहां अस्पतालों में जिंदगी बचाने की शपथ ली जाती है, वहीं अगर इलाज के नाम पर मरीजों की मजबूरी का सौदा होने लगे तो यह सिर्फ अनियमितता नहीं, बल्कि मानवता पर खुला प्रहार है। कुशीनगर के कप्तानगंज स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से सामने आया वायरल वीडियो सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की भयावह सच्चाई को उजागर कर रहा है।

वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि सरकारी अस्पताल में मुफ्त मिलने वाले ‘नॉट फॉर सेल’ लिखे इंजेक्शन को खुलेआम बेचा जा रहा है। मरीज के परिजनों से हजारों रुपये वसूल कर सरकारी दवा को निजी माल की तरह परोसा जा रहा है। यह वीडियो किसी एक कर्मचारी की नहीं, बल्कि सरकारी छत के नीचे चल रही वसूली की फैक्ट्री को बेनकाब करता है।

 मुफ्त दवा बनी कमाई का जरिया

स्थानीय लोगों के अनुसार कप्तानगंज सीएचसी में जीवनरक्षक दवाओं और इंजेक्शन को निजी बताकर बेचा जा रहा है। वायरल वीडियो में परिजन पैसे देने और नर्स द्वारा पैसे लेने की बात स्वीकार करते दिखाई दे रहे हैं। मामला सामने आने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

डर दिखाकर वसूली का आरोप

परिजनों का आरोप है कि उन्हें कहा गया,
“अगर यह इंजेक्शन नहीं लगा तो जान को खतरा है।”
इस डर के माहौल में गरीब परिजन मजबूर होकर जेब ढीली करने को मजबूर हैं। सवाल यह है कि क्या गरीब की जान की कीमत अब 3500 रुपये तय कर दी गई है?

 संरक्षण के बिना संभव नहीं यह खेल

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि यह संगठित उगाही प्रभारी चिकित्साधिकारी के संरक्षण में चल रही है। बिना उच्च स्तर की मिलीभगत के सरकारी अस्पताल में इस तरह की अवैध बिक्री संभव नहीं मानी जा रही। यही वजह है कि वीडियो वायरल होने के बावजूद अब तक न कोई निलंबन, न मुकदमा, न कार्रवाई हुई है।

 क्या है पूरा मामला

नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के नेवार छपरा निवासी ज्योति पाण्डेय, पत्नी अभिषेक पाण्डेय, को 21 जनवरी को प्रसव पीड़ा के चलते कप्तानगंज सीएचसी में भर्ती कराया गया था।
परिजनों के मुताबिक स्टाफ नर्स ने चार हजार रुपये के इंजेक्शन की जरूरत बताई। बाहर इंजेक्शन न मिलने पर नर्स ने 3500 रुपये में अपने पास से इंजेक्शन लगाने की बात कही। बाद में वही इंजेक्शन ‘नॉट फॉर सेल’ निकला। विरोध करने पर अस्पताल में हंगामा हुआ।
परिजनों ने चिकित्सक नीरज गुप्ता और स्टाफ नर्स मीरा राय व शीला पर पैसे लेने का आरोप लगाया है।

 स्वास्थ्य विभाग की साख कटघरे में

वीडियो वायरल होने के बाद भी अब तक किसी के खिलाफ न एफआईआर दर्ज हुई, न निलंबन, न ही विभागीय कार्रवाई। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि स्वास्थ्य विभाग अपने ही सिस्टम की सड़ांध ढकने में जुटा है।

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